मुगलकाल में भी दिवाली पर होती थी तंत्रसाधना, यहां मिलता है जिक्र

बज़्म-ए-आखिर में बताया गया है कि कैसे दिवाली (mentioning of Diwali in Bazm e Aakhir) के रोज महल में आने-जाने वालों पर अतिरिक्त नजर रखी जाती थी. यहां तक कि इस रोज बाहर से फल-सब्जियों की खरीदी तक बंद रहती थी.

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