लता जी, अब जब-जब भी हम लोग अपनी किसी याद को कुरेदेंगे, चाहे वो खट्टी हो या मीठी, आपका कोई न कोई गीत शायद उसी स्वाद में रसा-पगा होकर हमारे पास चला आएगा. आपने सिर्फ भारतीय फिल्मों को नहीं बल्कि भारत और उसके समाज को जो संगीत का रस दिया है, वो सदियों तक हमारी प्यास बुझाने वाला एक ऐसा अजस्र सोता है जो, हम भारतवासी कह सकते हैं कि, सिर्फ हमारे ही पास है... क्योंकि लताजी हमारी थाती हैं.
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