वह कहते हैं, ‘परिवार को राजी करना सबसे बड़ी चुनौती थी. बेटा कह रहा था, दुनिया क्या कहेगी. तो मैंने उसे समझाया जिसके बाद वह राजी हो गया. उसने शव को मेडिकल इंस्टीट्यूट सौंपने की जिम्मेदारी उठा ली है. बड़ी बेटी भी हिचकिचा रही थी. मैंने उससे कहा कि लोग क्या कहेंगे ये सोचने पर आज तक दुनिया में कोई बड़ा काम नहीं हुआ.
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