2 जुलाई, 1948 को बिहार के मुंगेर में जन्मे आलोक धन्वा ने अपनी क्रांतिकारी रचनाओं की बदौलत अलग जगह बनाई है. आलोक धन्वा की कविताओं की गूंज समूचे हिन्दुस्तान में हुआ करती थी. धन्वा कवि होने से अधिक एक कवि कार्यकर्ता के रूप में ज्यादा पहचाने गए हैं. उनकी कविताओं में राजनीतिक परिदृश्य, आपातकाल, नक्सलबाड़ी से लेकर तमाम आंदोलन की झलक दिखलाई पड़ती है.
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