कल्पना मनोरमा हिंदी साहित्य की दुनिया की ऐसी कथाकार और कवयित्री हैं जो शांत रहकर अपने शब्दों के माध्यम से धमक पैदा कर रही हैं और धमक की ऐसी जिसकी गूंज दूर तलक सुनाई देती है. अलग हटकर कविता रचना, कहानी कहना कल्पना मनोरमा की विशेषता है. उनके तीन काव्य संग्रह ‘कबतक सूरजमुखी बनें हम’, ‘बांस भर टोकरी’ और ‘नदी सपने में थी’ प्रकाशित हो चुके हैं. लंबे समय तक अध्यापन से जुड़ी रहने के बाद कल्पना अब पूरी तरह से साहित्य सृजन में रमी हुई हैं.
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