Urdu Poetry: जब तलक रिश्वत न लें हम दाल गल सकती नहीं- जोश महीलाबादी

जोश मलीहाबादी बगावती तेवर और इंकलाबी शायरी के लिए जाने जाते हैं. उन्हें शायर-ए-इंकलाब कहा जाता है. उर्दू के मशहूर शायर जोश मलीहाबादी का असली नाम शब्बीर हसन खान था. उनका जन्म लखनऊ के मलीहाबाद में 5 दिसंबर, 1894 में हुआ था. जोश मलीहाबादी ने घर पर रहकर ही अरबी, फारसी, उर्दू और अंग्रेजी की तालीम ली.

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