हरिशंकर परसाई की कहानी 'नया साल' एक व्यंग्य रचना है, जो समाज में फैले झूठ, दिखावे और आडंबर पर चोट करती है. नये साल की बधाई देने के माध्यम से लेखक ने कहानी में उस हर वर्ग को समेटने की कोशिश की है, जो किसी न किसी रूप में समाज को दूषित और कलंकित करने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और जिसके लिए नया साल हर बार उसके गलत कामों को और बेहतर तरीके से करने का साहस लेकर आता है. अपनी बाकी व्यंग्य कहानियों की तरह परसाई ने इसे भी बेहद दिलचस्प तरीके से लिखा गया है. कहानी को पढ़ते हुए लगेगा कि लेखक ने व्यंग्य के साथ कितना अनोखा प्रयोग किया है. तो आइए पढ़ते हैं कथाकार हरिशंकर परसाई की दिलचस्प कहानी 'नया साल'...
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