वे सिनेमा के उस काल में परिपूर्णता का प्रतिबिंब थे जब ऐसा कोई सोचता भी नहीं था। यह निर्देशक करीम आसिफ उर्फ के. आसिफ का परिपूर्णतावादी सोच ही था जिसने ‘मुगल ए आजम’ को केवल एक फिल्म नहीं बल्कि शाहकार बना दिया। यह फिल्म आज के जमाने में बनने वाली फिल्मों के बीच भी हिट है। के. आसिफ की जन्मतिथि (14 जून) पर अनंत विजय का आलेख...
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/ 'मुगल ए आजम' में दिखे थे सोने के श्रीकृष्ण, फिल्म के लिए के.आसिफ ने दिन-रात कर दिया था एक, तनातनी के बीच हुई थी शूटिंग
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