हरी मिर्च की खेती कम समय में तैयार होकर अच्छा मुनाफा देती है. लेकिन रोग प्रबंधन बेहद जरूरी है. श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार जड़ सड़न रोग एक महीने बाद पौधों को गिरा देता है. इससे बचाव के लिए कार्बेंडाजिम का प्रयोग करें. उकठा रोग बैक्टीरिया और फफूंद से फैलकर पूरी फसल नष्ट कर सकता है. इसलिए रोपाई से पहले बीज उपचार और नीम तेल 5 मिली प्रति लीटर का छिड़काव लाभकारी है. पर्ण कुंजन रोग में पत्तियां सिकुड़ जाती है. ऐसे में फफूंदनाशी या कीटनाशी का उपयोग करें. धनिया और मेथी की सहफसल भी रोग नियंत्रण में सहायक साबित होती है.
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/ हरी मिर्च की खेती में रोग प्रबंधन जरूरी, लापरवाही से हो सकता है भारी नुकसान, धनिया-मेथी बनेंगी सुरक्षा कवच
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